हर दफ़ा हमें खामियाँ गिनवाने आते हो,
हमारी किसी ख़ूबी को भी क्या पहचानते हो?
मेहनत का जो हर दफ़ा हिसाब लेने आते हो,
मेहनत की तपिश को क्या तुम जानते हो?
हर मोड़ पर जो आज़माने आते हो,
तुम क्यों हमारी शामें बुझाने आते हो?
हम भी सपने देखते हैं दिल में अरमान रखते हैं,
तुम्हें क्या पता, हम भी कितनी जहोजहद से गुज़रते हैं।
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