आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शनि देव

                
                                                         
                            न डर तेरा नाम सुनकर,
                                                                 
                            
न मन में कोई भय रख,
कर्मों की जो राह दिखाई,
उस राह पर विश्वास रख।

न सिंहासन का मोह तुम्हें,
न झूठी शान सुहाती है,
जो जैसा कर्म कमाता है,
वैसी ही राह दिखाती है।

तुम धीमे हो, पर न्याय तुम्हारा,
कभी नहीं रुकता है,
देर भले हो जाए लेकिन,
सच का सूरज उगता है।

जो टूट गया है पापों से,
उसे सुधरने का अवसर देते,
भटके हुए इंसान को भी,
सच्चाई के पथ पर ले लेते।

तेरी दृष्टि जहाँ पड़ती है,
अहंकार वहीं मिट जाता है,
झूठे महलों का हर सपना,
क्षण भर में बिखर जाता है।

हे शनिदेव बस इतनी कृपा,
कर्मों में सच्चाई रहे,
मन में दया, वाणी में मधुरता,
हर कदम पर अच्छाई रहे।

न माँगूँ सोना, न माँगूँ धन,
न माँगूँ जग की सारी शान,
बस इतना देना शनिदेव-
सच्चा रहे मेरा कर्म और पावन रहे मेरा मन।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर