आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हनुमान जी की निष्ठा

                
                                                         
                            राम नाम को साँस बनाया, राम नाम ही प्राण,
                                                                 
                            
सीने में बस राम को रखकर, बने भक्ति की शान।
ना चाही कोई राज-मुकुट, ना चाहा सम्मान,
प्रभु चरणों में जीवन अर्पित, यही उनका अभिमान।

सागर लाँघा, पर्वत लाए, संकट सारे टाल,
राम काज में तन-मन अर्पित, हर पल रहे निहाल।
जहाँ-जहाँ श्रीराम का नाम, वहाँ-वहाँ उनका धाम,
भक्तों के हर दुःख में आकर, लेते प्रभु का नाम।

शक्ति मिली तो सेवा की, विनय मिली तो झुके,
अपने बल का कभी न गर्व, प्रभु चरणों में रुके।
भक्ति ऐसी दीपक जैसी, जलती रहे तमाम,
हनुमत जैसे भक्त मिलें तो, धन्य हो जाए राम।

जब भी मन में डर घर करे, जब टूटे विश्वास,
सच्ची श्रद्धा से नाम पुकारो, मिट जाए हर त्रास।
रामदूत की छाया में फिर, क्यों मन हो परेशान,
संकटमोचन साथ हों जब, निर्भय हो इंसान।

जय हनुमान, जय बजरंगी, जय श्रीराम का नाम,
भक्ति, शक्ति और निष्ठा से, रोशन हो हर धाम।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर