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जीवन में भी तुम, मृत्यु में भी तुम

                
                                                         
                            स्वप्न वे अच्छे होते हैं,
                                                                 
                            
जिनमें तुम ही तुम आती हो
दिवस वे सुंदर हैं
जब-जब तुम मिला करती हो
संवेदनाएंँ वो अच्छी हैं
जो तुम जताती हो
धारणाएंँ वो पुख्ता होती हैं
जो तुम प्रस्तुत करती हो
जीवन उपवन तब सुखद है
जिसमें तुम चहका करती हो।
-
तुम परिचित भी हो मेरे लिए
तुम विस्मय भी हो मेरे लिए
तुम प्रश्न भी हो मेरे लिए
तुम प्रत्युत्तर भी मेरे लिए,
तुम्हें पूर्णतः जानता भी हूँ,
शोध-संदर्भ भी हो मेरे लिए
कभी केवल विषय वस्तु शीर्षक,
कभी संपूर्ण व्याख्यान हो मेरे लिए
तुम ज्ञात भी हो मुझे,
अज्ञात भी हो मेरे लिए
तुम्हार ही आना-जाना मेरे अंतर्मन तक
तुम्हीं अबूझ पहेली भी हो मेरे लिए।
-
उपक्रम वे परिपूर्ण होते हैं
जो तुम प्रस्तावित करती हो,
विधाएंँ वे स्पष्ट परिभाषित होती हैं
जो तुम लिख लेती हो
काव्य निबंध कहानी नाटक व्याख्यान की भाँति
तुम स्वयं मेरे मन में स्थापित हो
तुम मेरा साहित्य हो संवाद हो
वाद हो विवाद हो
मत अभिमत सहमत असहमत हो
तुम मेरी रचना का पथ-प्रदर्शक हो
पुस्तकों का शीर्षक हो,
कहानियों की भूमिका हो
कथाओं का उपसंहार हो
स्मृति में भी तुम, विस्मृति में भी तुम
जीवन में भी तुम, मृत्यु में भी तुम।
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23 घंटे पहले

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