मिलना और एकाकी होना,
कितने रूप दिखाता दोस्त ।
ड्यूटी से अब मुक्त होना,
सबको आज रूलाता दोस्त ।।
तुनुक मिजाजी कभी-कभी हो,
रूख दिखाता अपना रंग ।
कैसे भूला जा सकता है -
मधुर याद दोस्तों का संग ।।
घुमना फिरना बातें करना,
सुबह-शाम ड्यूटी आनन्द ।
चिंता रहित अकेले चलना ,
सिंह हो जैसे घूमे स्वछंद ।।
दोस्त हमारा सीधा सादा ,
रूख दिखाता अपना रंग ।
कैसे भूला जा सकता है -
मधुर याद दोस्तों का संग ।।
मेरी है विनती, यह संदेश ,
दूर हटे सब मन का क्लेश
जो हो गलती माफ करेगा,
जाते -जाते दोस्त विशेष ।।
समय गुजरते देर नहीं हो,
रूख दिखाता अपना रंग ।
कैसे भूला जा सकता है -
मधुर याद दोस्तों का संग ।।
-शोभनाथ सिंह यादव
एनटीपीसी सिंगरौली (उ0प्र0)।
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