दुनिया मे मोहब्बत के लिए काम कीजिये ।
इक जहती मुसावात वफ़ा आम कीजिये ।।
फलते नही है घर कोई माँ - बाप के बिना ।
टिकते नही वो घर भी संस्कार के बिना ।।
माँ - बाप के उस दर को भी प्रणाम कीजिये ।
इक जहती मुसावात वफ़ा आम कीजिये ।।
वंदन किया है मैने हर इंसान के लिए ।
बेचैनी- रोग दूर हो भगवान के लिए ।।
ऐसी दुआएं आप सुबो-शाम कीजिये ।
इक जहती मुसावात वफ़ा आम कीजिये ।।
मांगी दुआएं जिसने संतान के लिए ।
उसको न ठेस दीजिये भगवान के लिए ।।
इंसानियत को और न बदनाम कीजिये ।
इक जहती मुसावात वफ़ा आम कीजिये ।।
सागर ने लिखा गीत है बस आप के लिए ।
आवाज में हमारी तो आवाज दीजिये ।।
ये जिंदगी माँ - बाप के ही नाम कीजिये ।
इक जहती मुसावात वफ़ा आम कीजिये ।।
युवा कवि एवं शायर ~
शिवसागर यादव 'आद्रवनी'
निवास स्थान- धानी
जिला-महराजगंज (उत्तरप्रदेश)
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