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मैं तो चला गाँव की ओर

Mai To Chala Gaav Ki Or
                
                                                         
                            उस हरियाली सर जमीं काली घटा की ओर ।
                                                                 
                            
मैं तो चला गाँव की ओर ।।

जहँ तड़ाग संग उतुंग शिवालय ।
भोर अतिसुंदर लगे हिमालय ।।
कोयल जन मृदु भाष सी शोर ।
मैं तो चला गाँव की ओर ।।

तोयज़ की सुंदरता पानी अविरल की धारा ।
मन संग तन उठे खिल सांवल शाम हमारा ।।
जहँ विकरते विरंग - विरंग मोर ।।
मैं तो चला गांव की ओर ।।

जन जहँ मिले हहाक मिलान ।
संग विचार मिलन ।।
पूछत नैना हालचाल की ओर ।
मैं तो चला गांव की ओर ।।

युवा कवि एवं शायर
~ शिवसागर यादव 'आद्रवनी'

निवास स्थान~ धानी
जिला~ महराजगंज (उत्तरप्रदेश)

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8 वर्ष पहले

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