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तृप्त आत्मा हो जाये, मिट जायें वो रोग।

                
                                                         
                            टूटी हुई आत्मा, टूटे हुए लोग।
                                                                 
                            
कौन पता लगाएगा,उनको कौन सा रोग।

*निकल गया समय,बिखर गये सब सपने।
उनसे प्रीति न भय, रखा था दिल में अपने।
पल वो लौट के न आयेगा, खुशी न कोई शोक।
जिस संयोग में मिलन हुआ था, रहा न वो संयोग।
कौन पता -------।।०।।

*न रोना न सोना, गले न उतरे खाना।
कांटा बना बिछौना,निर्जल आँखों का कोना।
जलती दिया बुझा डाली, मन में हुआ वियोग।
न जाने अब कौन सी, सजा रहे हैं भोग।
कौन पता------------।।०।।

*चलो कहीं से कोई,आशा की किरण जगाते है।
मृत आत्मा को प्रेम की, संजीवनी पिलाते हैं।
शायद चमकें आँखें सूनी, मन हो जाये निरोग।
तृप्त आत्मा हो जाये, मिट जायें वो रोग।
कौन पता -------।।०।।
 
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एक घंटा पहले

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