शराब में वो नशा कहाँ
जो ग़म को छुपा दे
दिल के दर्द को आसूं के
सहारे बहा दे
लोग इसी भ्रम में
शराब पिया करते हैं
वो जानते नहीं की
वो शराब नहीं अपनी
जिंदगी पिया करते हैं
लोगों को देख जिया
करते हैं
रोते हैं घुट घुट के
इसीलिए शराब छुप छुप के पिया करते हैं
जान ना ले कोई उनके दर्द को
वो यही सोच के शराब पिया करते हैं
भूल जायेंगे उन गमों
जिन्हें सोच के वो शराब पिया करते
पर वो जाने अनजाने में उन ग़मो को
और भी ताजा किया करते हैं ......
- शिव कुमार खरवार
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