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Khud se kuch vada kiya jaaye

                
                                                         
                            चलो ऐसा करते हैं
                                                                 
                            
कुछ इरादा किया जाए
अबकी बार खुद से ही
कुछ वादा किया जाए
बहुत स्याह हुए हैं पन्ने
फिर भी फटते नहीं हैं
एक बार फिर से
उन्हें सादा किया जाए

कुछ बेचैन है अंदर
जिसको चैन नहीं है
उसको सांस लेने पर
आमादा किया जाए

यादों को डुबो देते हैं
किसी गहरे समंदर में
गहराई को दिल की
और ज्यादा किया जाए

हमसे ही हमारी
अब बात नहीं होती
ख्यालों को तुम्हारे
अब जाता किया जाए

क्या कोई पूछेगा
और क्या हम बताएंगे
अपनी हैरानियों परेशानियों पर
अब लबादा किया जाए

जिसने तरन्नुम दिया
और जहन्नुम दिया
उस खुदा से ही जाके
अब तकाज़ा किया जाए-

अबकी बार खुद से ही
कुछ वादा किया जाए—

———✍🏻शिल्पी

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7 वर्ष पहले

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