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गम ए मोहब्बत

                
                                                         
                            प्यार करती थी जब तुम किसी और से
                                                                 
                            
देखती थी मुझे फिर क्यों गौर से।

जिस खजाने की चाभी मेरे पास है।
ये गम भी मिला है किसी और से।

रुक गया है कोई लब पे आकर मेरे
मैं तो गुजरा मोहब्बत के हर दौर से।

- वजीर मनेरी
 
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3 वर्ष पहले

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