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बनते देखा है

                
                                                         
                            नाम को अक़्सर बदनाम बनते देखा है।
                                                                 
                            
मैंने बदनामी में भी नाम बनते देखा है।

जिन्हें इल्म तक भी न था राजनीति का,
उन लोगों को भी निज़ाम बनते देखा है।

मैं अपने गाँव का शहजादा ही अच्छा हूँ,
शहरों में लोगों को गुलाम बनते देखा है।

मैं भगवान नहीं, नेक इंसान बना क्योंकि,
दिखावे में रावणों को राम बनते देखा है।

किसी की नाकामी पर यूँ हँसा नहीं करते,
मैंने किस्मत से भी नाकाम बनते देखा है।

जिन्हें गुमां था अपनी शोहरत पे कभी,
वक़्त आने पर उन्हें आम बनते देखा है।

रास नहीं आई मुझे सहर-ए-ख़ुशी कभी,
पल भर में गमों की शाम बनते देखा है।

जिस प्यार की बुनियाद आज़ादी रही,
उस प्यार को भी लगाम बनते देखा है।

सुना था कभी, पैसों से ईमान बड़ा है,
यहाँ पैसों की दम पे काम बनते देखा है।

 
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38 मिनट पहले

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