मोहब्बत का दो सिरों से वो फ़साना क्या होता है,
इक सिरे पर रुक के ख़ुद को ही गँवाना क्या होता है?
जो कभी महफ़िल की जान था, कभी उस से पूछना,
तन्हाई के ख़ौफ़ में दिल को जलाना क्या होता है?
तुम तो उड़ कर चल दिए, आज़ाद मौसम देख कर,
क़फ़स में हर साँस को यूँ घुट जाना क्या होता है?
रात के सन्नाटे में जो सिर्फ़ आहट ढूँढता,
उस नज़र से पूछना रस्ता सजाना क्या होता है?
तुमने तो दामन छुड़ाया, बात ख़त्म हो गई,
पर बिखर कर रोज़ यादों को बचाना क्या होता है?
लब पे झूठी हँसी, आँखों में अश्कों का समंदर,
ज़ख़्म सीने में छुपा कर मुस्कुराना क्या होता है?
सब सवाल पूछो ज़माने से, गिला मत छोड़ना,
कैसा होता है दर्द, या फिर रूठ जाना क्या होता है...
बस कभी उस से ना कहना कि वफ़ा किसको कहें,
वो बताएगा मोहब्बत में फ़ना होना क्या होता है।
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