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बेखुदी में

                
                                                         
                            बे खुदी में सवाल करते हो
                                                                 
                            
तुम हमेशा कमाल करते हो

जब किसी राह में हो तुम मिलते
कितनी खुशियां बहाल करते हो

वस्ल की शब में हिज्र की बातें
मेरा जीना मुहाल करते हो

इश्क़ हो रूठना मनाना हो
काम सब बेमिसाल करते हो

सब के सब रंग हैं ये कुदरत के
क्यों हरा पीला लाल करते हो

इक न इक दिन शमा मिलेंगे हम
तुम क्यों इतना मलाल करते हो
-शमा परवीन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

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