आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

साड्डे दिल विच खंज़र मार गया तू

                
                                                         
                            साड्डे दिल विच खंज़र मार गया तू
                                                                 
                            
जदो सात समुंदर पार गया तू
दिल ख़ून दे आँसू रौंदा ए
जब तोड़ के कौल करार गया तू

मैं फिरदी ग़म दी मारी सजणा
मैनू इश्क़ दी लगी बीमारी सजणा
फंस गई कुड़ी कंवारी सजणा
साड्डी जिंद नू प्यार पे वार गया तू
साड्डे दिल विच खंज़र मार गया तू
जद्दो सात समुंदर पार गया तू

मैनू जग दी कोई फिकर नईं
तेरे दिल विच अपणा घर नईं
मेरी दुआ दा रब कोई असर नईं
ओ रब्बा सज्दा मेरा बेकार गया यू
जब तोड़ के कौल करार गया तू
साड्डे दिल विच खंज़र मार गया तू
-अश्क़ फतेहपुरी 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर