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सांसे बेगानी

                
                                                         
                            सांसे बेगानी
                                                                 
                            

साँसें कब अपनी हुई हैं? ,
फिर इन पर इतना इतराना क्यों?
धड़कनें कब हमारे कहने से धड़की हैं?,
फिर इन पर इतना इठलाना क्यों?
एक पल की ज़िंदगी है,
कब क्या हो जाए—किसे खबर?
किसी को मिल जाए हमेशा की नींद,
तो किसी के आँगन में खिल जाए
नए चिराग की रोशनी.
ज़िंदगी बस एक सफ़र का नाम है,
कौन जाने कहाँ ठहर जाए…?
जो मिला है, उसे मुस्कुराकर जी लो,
क्या पता अगला पल
किसका हो जाए?
-शाहाना परवीन 'शान
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1 hour ago

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