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बहुत मुश्किल से फिर मुस्कुराना सीखा है।

                
                                                         
                            कौन-सी बात कहना चाहते हो तुम मुझसे,
                                                                 
                            
वही… जिससे एक बार फिर से मैं टूट जाऊँ?
जिससे एक बार फिर से मैं बिखर जाऊँ,
जिससे एक बार फिर से
मेरे होंठों की हँसी गायब हो जाए?
नहीं… अब ऐसा कुछ नहीं होगा।
बहुत संभाला है मैंने खुद को,
बहुत मुश्किल से फिर मुस्कुराना सीखा है।
अब किसी के शब्दों को
मैं यह अधिकार नहीं दूँगी कि
वो आए और अपने पैरों तले मेरी खुशियाँ
रौंदकर चला जाए.
जो बीत गया, उसे बीत जाने दो,
जो दर्द मिला, उसे पीछे छोड़ दो.
मैं अब न टूटूँगी, न बिखरने दूँगी खुद को
न अपनी मुस्कान खोने दूँगी।
-शाहाना परवीन 'शान
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48 minutes ago

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