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बारिशों का मौसम है

                
                                                         
                            दर्द की ख़ुमारी है
                                                                 
                            
बारिशों का मौसम है

दिल में बेकरारी है
बारिशों का मौसम है

ख्वाहिशें तड़पती हैं
अरमां मचलते हैं

ख़ुद की अशक़ारी है
बारिशों का मौसम है

ज़ुल्फ़ की ये ज़न्जीरें
तेग़ो नक्श़ लरज़ते हैं

कमसिनी दुलारी है
बारिशों का मौसम है

ग़म की किसे परवाह
होश है ख़ुदी में गुम

ख़ुद की ख़ुद से यारी है
बारिशों का मौसम है

हम हैं उनकी यादें है
दिल में दीप जलते हैं

रौशनी ये प्यारी है
बारिशों का मौसम है

दिल में नक़्श जिनके हैं
हैं नुमू उन्हीं के शाह

जि़क्र लब पे जारी है
बारिशों का मौसम है

- शहाबुद्दीन शाह क़न्नौजी
हाजी गंज,कन्नौज,२०९७२५
फोन ८२९९६४२६७७

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले

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