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आईना दार

                
                                                         
                            नख़रे गुलाब के सभी तुझमें समा गये
                                                                 
                            
और हम बन गये तेरे आईना दार दोस्त

खुश्बू ए हुस्नों इश्क़ तबस्सुम फ़रोग़ और
और हम बन गये तेरे आईना दार दोस्त

देखा तुझे सलाम किया दिल से जा लगे
और हम बन गये तेरे आईना दार दोस्त

रट सी लगी तख़य्युले जाना कि अर्ज़बर
और हम बन गये तेरे आईना दार दोस्त

खुश्बू ने कुछ कलाम किया शाह से अत्तार
और हम बन गये तेरे आईना दार दोस्त

- शहाबुद्दीन उद्दीन शाह क़न्नौजी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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