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च से 'चिड़िया'

CHA SE CHIDIYA
                
                                                         
                            अकसर आंगन में दिख जाती थी गौरेया
                                                                 
                            
बच्चे उड़ा कर हो जाते थे खुश
जब नहीं दिखती थी तब आटे की
लोई सेबना कर दी जाती थी 'चींचीं'

और बच्चे फिर हो जाते थे खुश
वक़्त की मार और बदलाव की बयार ने
दोनों को उड़ा दिया
बच्चे अब नहीं होते खुश

देखते हैं बस तस्वीरों में फोन की स्क्रीन पर
अब बस याद कर लेते हैं.. च से 'चिड़िया'

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8 वर्ष पहले

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