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बेजुबां सा इश्क़

                
                                                         
                            उसकी आँखों में उतर कर,
                                                                 
                            
मैंने अपनी ही तस्वीर पाई,
उन्हें भी इश्क़ है हमसे ही,
राज़ उसने हमीं से छुपाई,
जो लफ़्ज़ों से न बयाँ हुआ,
अगर मैं नाम लूँ उसका तो,
उसमें ज़माने की है,रुसवाई है,
इसलिए ज़माने उसे छुपाते हैं,
बेजुबां सा इश्क़ है ये हमारा,
सौरभ सिंह राजपूत
 
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4 वर्ष पहले

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