आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुम्हारे तरफ बढ़ते कदम को रोक लेंगे

                
                                                         
                            बिखरे हुए फूलों की कसम
                                                                 
                            
हम तुम्हे फूल नहीं देंगे
तुम गुजरो गर सामने से
हम मुंह फेर लेंगे
तुमको रुसवाई का पता ही नहीं
तुम्हारे तरफ बढ़ते कदम को रोक लेंगे
बिखरे हुए फूलों की कसम
हम तुम्हे फूल नहीं देंगे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर