यादों में रहते हो तुम,
मेरी खामोश कहानी के।
मखमली हृदय के अन्दर,
बरसते अश्कों के पानी के।
ढूंढता हूं तेरी यादों की गलियों में,
वो प्रीत के नगमें जवानी के।
दीपक सी झिलमिलाती है तन्हाइयां,
गुनगुनाने गीत रवानी के।
कागज पर बिखरे इन शब्दों की कसम,
तेरे हिस्से रहे,मेरे किस्से जवानी के।
यादों में रहते हो तुम,
मेरी खामोश कहानी के।
-संतराम शर्मा'हिन्दी'
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