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तलाश करने को खुशियां सफर करें कितना

Talash Karne Ko Khushiyan Safar Karen Kitna
                
                                                         
                            जहाँ से दूर भी जाकर भला मिलेगा क्या
                                                                 
                            
किसी ने कुछ भी है अच्छा वहां कहा ही नही

तलाश करने को खुशियां सफर करें कितना
अगर न दृष्टि हो तो वो कहीं मिले भी नही

मैं देखता हूँ तेरे पास भी कुछ है तो सही
जरा तूँ गौर कर ये तेरी खुशियां तो नहीं.

तू इतना क्यों भला कमजोर समझता खुद को
असीम है तू और क्षमता भी तेरी कम तो नही.

अभी से क्यों भला हतास हुआ जाता है
हजार राह है मंजिल की भी कमी तो नही

जिसे भी चाहे तूँ हासिल जरूर कर लेगा
जो दायरे से हो बाहर वो शै बनी ही नही

तेरे ही हाथ में दीपक की रौशनी भी छिपी
अंधेरा दूर न हो इतनी भी वो घनी तो नही

चमक उठेगा तूँ हजार दीप जैसे जलें
तूँ चाँद ही है कमी तुझमे रौशनी की नही

""सरु""

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8 वर्ष पहले

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