कोई शिकारी नहीं जिंदगी
जिंदगी आती रही है हमेशा
कोरे पन्ने या कोरे मन के साथ
हमने लिखी इबारत पन्ने पर
या उकेरा ख्वाबों की तस्वीर
भरे स्याही अपने पसंद के
या चुने रंग मन को भाने वाले
इतना ही तो है हाथ मे सबके
आगे का काम ऊपर वाले का
उसने कैसी आंकी मेहनत
क्या लगाई इबारत की
या तस्वीर की कीमत
चलो छोड़ देते हैं बिचारी ज़िन्दगी को
लिखते रहते है भला सा कुछ
रंग भरते रहते हैं मनभावन तस्वीर में
शायद जिंदगी वो अबसे ही
खुशनुमा करने का इरादा करले
सरोज यादव सरु
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