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शिकारी नहीं है जिंदगी

Shikari Nahi Hai Jindagi
                
                                                         
                            कोई शिकारी नहीं जिंदगी
                                                                 
                            
जिंदगी आती रही है हमेशा
कोरे पन्ने या कोरे मन के साथ
हमने लिखी इबारत पन्ने पर
या उकेरा ख्वाबों की तस्वीर
भरे स्याही अपने पसंद के
या चुने रंग मन को भाने वाले
इतना ही तो है हाथ मे सबके
आगे का काम ऊपर वाले का
उसने कैसी आंकी मेहनत
क्या लगाई इबारत की
या तस्वीर की कीमत
चलो छोड़ देते हैं बिचारी ज़िन्दगी को
लिखते रहते है भला सा कुछ
रंग भरते रहते हैं मनभावन तस्वीर में
शायद जिंदगी वो अबसे ही
खुशनुमा करने का इरादा करले

सरोज यादव सरु

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8 वर्ष पहले

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