सफर है जिंदगी राहों के भंवर मिलते हैं
इसकी राहों में सभी गिरते और सम्भलते हैं
मंजिले सबकी है वो इंतजार सबका करे
मिलती है उनको जो हिम्मत के साथ चलते हैं
सफर है जिंदगी तो रुकना क्यों जरूरी है
तेरी मंजिल से तेरे कदमो की क्यों दूरी है
होके मायूस रहा तब भी क्या हासिल होगा
तेरे हाथों से तेरा वक्त ही गाफिल होगा
आई मुश्किल तो बड़ा हम ही मान लेते हैं
होती ओझल है जो लड़ने की ठान लेते हैं
सफर है जिंदगी राहों के भंवर मिलते हैं
इसकी राहों में सभी गिरते और सम्भलते हैं
सरोज यादव"सरु"
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