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पिता अपनी उदासी का ये अंजाम करता है

Pita Apani Udasi Ka Ye Anjam Karta Hai
                
                                                         
                            फुरसत ही नही रही उसे कभी अपने सपनो के लिए
                                                                 
                            
भागता रहा जीवन भर वह अपनो के लिए
जरूरतों ने कभी दो पल सुकून के दिए ही नही
कभी मिला मौका सुख का तो भी उसने लिए ही नही
बस एक आस में मजदूर बन खटता रहा है वो
करेगा साध पूरी सपने बस बुनता रहा है वो
कभी दो पल उसके भाग्य में खुशियों के आएंगे
खबर क्या थी कि उसके लाडले घर छोड़ जाएंगे
उमर की शाम में भी कितना ज्यादा काम करता है
पिता अपनी उदासी का भी ये अंजाम करता है
सरोज सरु

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8 वर्ष पहले

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