आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझे आलीशान जिंदगी का तोहफा मत दो

                
                                                         
                            मुझे फूलों की सेज मत दो मुझे विश्वास दो साथ होने का
                                                                 
                            
मुझे कांटो पर चलने से कोई गुरेज नही

मुझे सोने चांदी के गहने से मत सजाओ मेरा साथ दो
मुझे सर पर कांटो के ताज से कोई गुरेज नही

मुझे आलीशान जिंदगी का तोहफा मत दो ,मुझे संघर्ष करने दो
मुझे लंबी अंधेरी राहों से भी कोई गुरेज़ नही

मुझे तलाशने दो जिंदगी की छुपा ली गयी मेरी अनमोल खुशियां
मुझे उसके दिए धमकियों का कोई डर नही

मुझे लंबी जिंदगी का तोहफा भी मत दो ,मुझे दृढ़ता दो
मुझे झंझावात भरे तूफानों से कोई गुरेज़ नहीं

मेरे लिए मत आसान करो इन राहों को,मुझे चलने का अधिकार दो
मुझे राह में आई चुनौतियों से कोई गुरेज नही

मुझे चाहिए सिर्फ तुम्हारी आँखों मे अपने लिए गर्वित होने का भाव
मुझे दुनिया के किसी अभाव का कोई डर नही

मुझे सिर्फ और सिर्फ विश्वास दो तुम मेरे साथ हो
मुझे जीवन के किसी भी परीक्षा का कोई डर नही

मुझे फूलों की सेज मत दो मुझे विश्वास दो साथ होने का
मुझे कांटो पर चलने से कोई गुरेज नही

सरोज यादव सरु

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर