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Meri Rah Ke Tumhi Ujale Ho

मेरे अल्फाज़

मेरी राह के तुम्हीं उजाले हो

Saroj Yadav

277 कविताएं

289 Views
जब भी दस्तक दी है गम ने
तब तुमने आकर थाम लिया
दिल को जब राह नही सूझी
उसने तब तेरा नाम लिया

जीवन के इस ताने बाने में
इस तरह मैं उलझी रहती हूं
कोई छोर नजर आता ही नही
और मैं सुलझाती रहती हूं

मेरी राह के तुम्ही उजाले हो
मुझे राह दिखाते रहना तुम
जब लगे कि मैं गिर जाऊंगी
तब मुझे सहारा देना तुम

हरदम तुमसे ही मांगा है
मुझे आश्रय तुम देते रहना
ये जीवन हंस कर दे दुंगी
जब जी चाहे इसे ले लेना

बड़ी कठिन राह है दुनिया की
फिसलन से भरी सब गलियां हैं
हर कदम पे धोखा बिछा हुआ
जाने कौन यहां पर छलिया है

मैं प्रीत का संबल लेकर के
तेरे साथ करूँगी सफर पूरा
क्या हुआ कदम जो साथ नही
तेरे साथ तो ये मन है पूरा

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