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Meri Rah Ke Tumhi Ujale Ho

मेरे अल्फाज़

मेरी राह के तुम्हीं उजाले हो

Saroj Yadav

285 कविताएं

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जब भी दस्तक दी है गम ने
तब तुमने आकर थाम लिया
दिल को जब राह नही सूझी
उसने तब तेरा नाम लिया

जीवन के इस ताने बाने में
इस तरह मैं उलझी रहती हूं
कोई छोर नजर आता ही नही
और मैं सुलझाती रहती हूं

मेरी राह के तुम्ही उजाले हो
मुझे राह दिखाते रहना तुम
जब लगे कि मैं गिर जाऊंगी
तब मुझे सहारा देना तुम

हरदम तुमसे ही मांगा है
मुझे आश्रय तुम देते रहना
ये जीवन हंस कर दे दुंगी
जब जी चाहे इसे ले लेना

बड़ी कठिन राह है दुनिया की
फिसलन से भरी सब गलियां हैं
हर कदम पे धोखा बिछा हुआ
जाने कौन यहां पर छलिया है

मैं प्रीत का संबल लेकर के
तेरे साथ करूँगी सफर पूरा
क्या हुआ कदम जो साथ नही
तेरे साथ तो ये मन है पूरा

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