आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे दामन में सिर्फ खुशियां हैं

Mere Daman Me Sirf Khushiyan Hain
                
                                                         
                            मेरे लिए है कठिन कब ये जिंदगी का सफर
                                                                 
                            
मेरी पनाह में तो जिंदगी भी पलती है
मुझे रुलायेंगी कमजोर मुश्किलें कैसे
मैं प्यार देती हूँ और आकर खुशी उछलती है.

मैंने कब हारने का सौदा किया
नापसन्द मुझको हर मायूसी है
जो भी मेरे सामने रोता आये
राहे गम भूल खिलखिलाती है .

मेरे दामन में सिर्फ खुशियां हैं
हर किसी को उधार दे दूं मैं
वापिसी भी नही जरूरी है
ब्याज सी खुद ये फैली जाती है

तुम मेरी फिक्र अब भुला भी दो
मैंने जीना है कैसे सीख लिया
जितने भी दुख मेरे मेहमान बने
अब न आँखे ये झिलमिलाती हैं

लोग दुनिया में दर्द में डूबे
मेरा गम कुछ भी नही है उनपे
थोड़ा गम बांटना जो चाहूँ तो
जिंदगी थोड़ी मुस्कराती है

जो हुनर हँसने का दिया तुमने
आज भी साथ वो निभाती है
जितने भी चाहे बदल जाओ तुम
ये तो मेरे साथ जिये जाती है

""सरु""

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर