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Mere Daman Me Sirf Khushiyan Hain

मेरे अल्फाज़

मेरे दामन में सिर्फ खुशियां हैं

Saroj Yadav

217 कविताएं

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मेरे लिए है कठिन कब ये जिंदगी का सफर
मेरी पनाह में तो जिंदगी भी पलती है
मुझे रुलायेंगी कमजोर मुश्किलें कैसे
मैं प्यार देती हूँ और आकर खुशी उछलती है.

मैंने कब हारने का सौदा किया
नापसन्द मुझको हर मायूसी है
जो भी मेरे सामने रोता आये
राहे गम भूल खिलखिलाती है .

मेरे दामन में सिर्फ खुशियां हैं
हर किसी को उधार दे दूं मैं
वापिसी भी नही जरूरी है
ब्याज सी खुद ये फैली जाती है

तुम मेरी फिक्र अब भुला भी दो
मैंने जीना है कैसे सीख लिया
जितने भी दुख मेरे मेहमान बने
अब न आँखे ये झिलमिलाती हैं

लोग दुनिया में दर्द में डूबे
मेरा गम कुछ भी नही है उनपे
थोड़ा गम बांटना जो चाहूँ तो
जिंदगी थोड़ी मुस्कराती है

जो हुनर हँसने का दिया तुमने
आज भी साथ वो निभाती है
जितने भी चाहे बदल जाओ तुम
ये तो मेरे साथ जिये जाती है

""सरु""

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