क्या नहीं लगता जरूरत है सड़े गले कूड़े को साफ कर देना चाहिए
विरासत समझ के ढोने वाले बीमार विचार
जिसने हमेशा इमोशनल अत्याचार का सहारा लिया
हर ज्वलंत समस्या की जवाबदेही से बचने को
बहुत जरूरी है हम साफ करें अगर दिवास्वप्न से पेट नहीं भर सके बरसात में सर भीगने से न बच सके
न दे सके जो हाथों को काम मेहनत का दाम
न हो सके अपने ही आंगन में गुड्डे गुड़ियों का खेल
न हो सके आपस मे बस इनके कारण मेल
तो न देखें आत्मगर्वित होकर खोखले दिवास्वप्न
करें स्वागत नए कल का,पहिया बने द्रुत गति से दूर ले जाएं
इन इमोशनल अत्याचारियों के साम्रज्य से अपने कर्णधारों को
न होने दे बीमार इनको संक्रामक विचारों से
विरासत समझ के ढोने वाले बीमार विचार
साफ करने ही होंगे हमें
क्योंकि अब तभी जीवित रह सकेगा
कल देश समाज हम आप और हमारे बाग की नई पौध
सरोज यादव सरु
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