दुनिया में खुशियां उसकी है खुशियों का जो व्यापार करे
अपनी खुशियों की चाहत में किसी आंख में हम आँसू न भरे
दुनियाँ एक सुंदर जगह जिसे ईश्वर ने खूब सजाया है
हर एक रहे और फूले फले ये सोच के इसे बनाया है
सबसे एक प्रेम भरा नाता हर कोई न क्यों स्वीकार करे
अपनी खुशियों की चाहत में किसी आँख में हम आँसू न भरे
क्यों दर्द का सौदा करते हो अच्छा तो ये व्यापार नहीं
इन रक्त में डूबे फूलों से उसको पूजा स्वीकार नहीं
पूजा की थाली में मानवता रख क्यों इष्ट का न श्रृंगार करें
अपनी खुशियों की चाहत में किसी आंख में हम आंसू न भरें
है आज हताशा दुनिया मे कोई तो अब आगे आये
कैसे सुंदर संसार बने इसकी परिभाषा जो समझाए
मरते कटते इस दुनिया में नवजीवन का संचार करे
अपनी खुशियों की चाहत में किसी आंख में हम आंसू न भरें
सरोज यादव सरु
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