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एक हंसी क्यो नही देते मुझे खजाने से.

Ek Hansi Kyon Nahi Dete Mujhe Khajane Se
                
                                                         
                            जतन करो कोई कि लब पे तबस्सुम आये
                                                                 
                            
बड़ी उदास सी दिखती फ़िजा जमाने से
असर जरूर हुआ है तुम्हारे आने का
कितना कुछ बदला है एक तेरे मुस्कराने से
एक हंसी क्यो नही देते मुझे खजाने से.

आज दुनिया मे जिसे देखिए अकेला है
जिसे भी अपना कहो स्वार्थ का झमेला है
सिर्फ एक चाह को विशाल वृक्ष बनने दे
कुछ अलग क्यों नही करते भला जमाने से
एक हंसी क्यो नही देते मुझे खजाने से.

कुछ तो बदला है अलग रंग है फ़िज़ाओं पर एक बिजली सी तड़प उठती है घटाओं पर
फूल से खुशबू लिए झूमती बलखाती पवन
तुमको देखें लगे देखा नही जमाने से
एक हंसी क्यो नही देते मुझे खजाने से.

जब नही आये थे कुछ और थी मेरी उलझन
पास हो तुम तो क्यों शोर मचाये धड़कन
जाने किस रंग में रंग जाए मेरा साधु मन
एक शिक़वा भी नही आज है जमाने से
एक हंसी क्यो नही देते मुझे खजाने से.

बड़े मशरूफ़ रहा करते हो मैंने माना
वक्त का फूल मुझे आज तो देते जाना
तुम्हारे हाथ तो खाली नही हैं इतने भी
मेरी खुशियां भी चली जाए तेरे जाने से
एक हंसी क्यो नही देते मुझे खजाने से.

सरोज""सरु""

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8 वर्ष पहले

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