गम ने हमारा साथ तो छोड़ा नही कभी
पर तुझको याद करके मुस्कराते हम रहे
जितना भी उसको लेना है वो इम्तहान ले
बस दे मुझे तुम्हे और कामयाब खुद रहे
डरता है कौन मुश्किलें आती हैं आ रहें
ठोकर लगा के हम भी अपनी राह चल रहे
मैं भी उदास हूँ न तुम्हे रहने दूँ कभी
दुनिया है इसकी आदी वो रहती है तो रहे
देखो वो दिख रही है कोई रौशनी तो दूर
पहुंचेंगे हम भले ही अभी दूर दिख रहे
कोई जो हमे देख के खिल्ली उड़ा रहा
हम भी कहाँ उन्हें भला सर पे बिठा रहे
सरोज यादव सरु
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