चुप रहकर बोला जाता है
नजरों से तोला जाता है
एक दर्द बसा कर सीने में
एक खास मजा है जीने में
काली रातों की खामोशी
काजल में घोला जाता है
चुप रह कर बोला जाता है
सब दर्द बयां हो जाता है
आंखों से सब कह देता हैं
एक गम का दरिया बहता है
जो हाले दिल कह देता है
बिन आग के मोम पिघलता है
सांसों को तोला जाता है
चुप रह के बोला जाता है
जब चैन जिया का खोता है
दिल चुपके चुपके रोता है
जब आस का पंक्षी उड़ जाए
जीने की वजह भी मुड़ जाए
दिल गीली आग में जलता है
सांसो से शोला जाता है
चुप रह के बोला जाता है
आशा का दीपक जलता है
बादल पलकों में पलता है
दुनिया मे मेले रोज लगें
पर प्रेमी तनहा होते हैं
पलकों में रात बितातें हैं
सपनो का डोला जाता है
चुप रह के बोला जाता है
सरोज यादव सरु
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