चाँद टिक गया टहनी पर
देख सुहानी रात
बात बात में भोर हो गयी
फिर से छूटा साथ
कल मिलने का वादा करके
छुड़ा लिया था हाथ
लेकिन लंबा अंधियारा था
आया न वो पास
शरद चांदनी झिलमिल करके
जाने करे क्या बात
रात न सोये आंख न झपके
करे चाँद को याद
चाँद सलोना आदत उसकी
करे है झूठी बात
दो दिन का वादा कर जाए
ना आये आधे मास
फिर भी प्रेम में भीगी रैना
कभी न तोड़े आस
मिलेगा फिर से मेरा चंदा
रख टहनी पर हाथ
बीत गई हैं सदियां फिर भी
हैं अब तक ये साथ
रात चाँद का साथ न छूटा
रहें दूर या पास
चाँद टिक गया टहनी पर
देख सुहानी रात
बात बात में भोर हो गयी
फिर से छूटा साथ.....
सरोज""सरु""
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