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बड़ी शिद्दत से राहें देखती है अब वही बहनें

                
                                                         
                            बड़ी शिद्दत से राहें देखती है अब वही बहनें,
                                                                 
                            
कभी जो रूठ कहती थीं मेरे घर तू तो मत आना.
है आंखों में भरे आंसू हलक से कुछ नही उतरे,
कभी गुस्से से कहती थी मेरे हिस्से का मत खाना.
जुबां से कुछ नही कहती कभी चुप रखना मुश्किल था
सभी पर हक समझती थी छुपाना कुछ भी मुश्किल था
वो अब आंखों से कहती हैं ओ भाई जल्दी तू आना
बड़ी शिद्दत से राहें देखती है अब वही बहनें,
कभी जो रूठ कहती थीं मेरे घर तू तो मत आना
चलन कैसा ये दुनिया का बहन होती पराई है
जनम के साथ ही खुशियां जो बहने लेके आई हैं
बगैर इनके है घर सूना नही कीमत है भाई की
बहन की सांस जब तक है बड़ी इज्जत है भाई की
विदाई में छलकती आंख बहनो का हो जब जाना
बड़ी शिद्दत से राहें देखती है अब वही बहनें,
कभी जो रूठ कहती थीं मेरे घर तू तो मत आना
कभी मांगा न बहनो ने कोई दौलत जमाने से
नही रोके कोई मुश्किल उन्हें रिश्ते निभाने से
हमेशा रंग भरती हैं कोई मौका हो रस्में हो
हमेशा वादों पर कायम उठाईं जैसे कसमे हों
अभी बहनो ने मतलब से नही सीखा बदल जाना
बड़ी शिद्दत से राहें देखती है अब वही बहनें,
कभी जो रूठ कहती थीं मेरे घर तू तो मत आना

सरोज"सरु"

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8 वर्ष पहले

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