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मेरे अल्फाज़

आजादी का जश्न अधूरा

Saroj Yadav

271 कविताएं

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आजादी का जश्न अधूरा अभी देश का स्वप्न अधूरा
बहुत तरक्की हमने करली लेकिन अंतिम लक्ष्य अधूरा
युग युग से नई चुनौती है ,हर बार दिखी कोई ज्योति है
हर युग मे एक योद्धा जागा ,तब हार के है कायर भागा
कभी प्रेम के हैं टूटे धागे ,कभी घर मे ही विषधर जागे
अब भी एक कठिन परीक्षा है ,अभी दिखती भूख अशिक्षा है
कई उज्ज्वल लक्ष्य भी हैं साधे ,कई तिलक लगे अपने माथे.
आवश्यक सब खुशहाल बने गरिमा का लक्ष्य हुआ पूरा
बहुत तरक्की हमने करली लेकिन अंतिम लक्ष्य अधूरा
आजादी का जश्न अधूरा अभी देश का स्वप्न अधूरा
बहुत तरक्की हमने करली लेकिन अंतिम लक्ष्य अधूरा.....

सरोज यादव""सरु""

#AzadAlfaz

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