क्या हम मानव इस पृथ्वी का
सौंदर्य बनाए रख सकते हैं?
जीभ के स्वाद मात्र के लिए
हम जीवों की हत्या करते हैं।
उन्हें तड़पा- तड़पाकर मारते हैं.
और मजे से खाया करते हैं।
उन इन्हें-मुन्ने पशु-पक्षीयों को
उन प्यारी प्यारी मछलीयों को
कष्ट दिए बिना, सताए बिना
क्या हम अपना भोजन कर सकते हैं?
क्या हम मानव इस पृथ्वी का
सौंदर्य बनाए रख सकते हैं?
हरे-भरे उन पेड़ों का
चहचहाती उन चिड़ियों का
नदियों का और झीलों का
क्या हम संरक्षण कर सकते हैं?
उद्योगों से, कारखानों से
गाड़ियों से तो वाहनों से
जो जहर वातावरण में फैलाते हैं
क्या उसे नियंत्रित कर सकते हैं?
क्या हम मानव इस पृथ्वी का
सौंदर्य बनाए रख सकते हैं?
कुटनीतज्ञ नेताओं से, कट्टर बाबाओं से
हम प्रभावित होते हैं, मुर्ख बनते हैं।
धर्म के नाम पर, देश के नाम पर
आपस में हम लड़ते और मरते हैं।
आंतकियों की घुसपैठ
धमकी जिहाद के नारों कों
वैज्ञानिकों के परमाणु अविष्कारों को
क्या हम रोक सकते हैं?
क्या हम मानव इस पृथ्वी का
सौंदर्य बनाए रख सकते है?
~सरफराज अंसारी
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