कुण कैवै धोरा मांय कीं कोनी,अठै सूरज सू सगाई है,
तपती दुपहयां मांय भी अठै,घुघंट मांय मुसकाई है।
लोगा सारु आ रैत हुसी,म्हा सारु ओ कुंकम रोली है,
अठै री कङक लपट मांय भी,बाजे 'केसरिया बालम' री बोली है।
कुण कैवै धोरां मांय कीं कोनी,अठै पाणी सू महंगी लाज अठै,
घी ढलै तो कीं कोनी,पण पाणी री बूंद-बूंद माथै राज अठै।
अठै कुआं री गहराई मांय,धीरज रा मोती निपजै है,
सूखी धरती रा मिनखां रा,कालजा समंद सूं बङा गाजै है।
कुण कैवै धोरां मांय कीं कोनी,अठै संसकार री जागीर खङी,
लाख मुसीबत आ ज्यावै,पण अठै मनवार री रीत अङी।
बाजरै री रोटी मांय अठै,छप्पन भोग रौ सुवाद गिणै,
आ धोरां री पावन माटी,पूरी दुनियां मांय अनूठौ मान बिणै।
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