जिंदगी के इस रंगमंच पर,
हँसना भी पड़ता है, रोना भी पड़ता है।
कभी नाचना पड़ता है, कभी गाना भी पड़ता है।
कभी सीखना पड़ता है, कभी सिखाना पड़ता है।
हर कोई अपना-अपना किरदार निभा रहा है,
कोई हँसा रहा है, तो कोई रुला रहा है।
कोई कुछ पल साथ चलकर याद बन जाता है,
तो कोई जीवनभर का एहसास बन जाता है।
इस रंगमंच पर हर रोज़ नया अनुभव मिलता है,
कहीं अपनों का साथ, कहीं अपनों से दर्द मिलता है।
कभी ठोकरों से सीख मिलती है,
तो कभी प्यार में सुकून मिलता है।
न कोई यहाँ हमेशा ठहर पाया है,
न कोई अपना किरदार हमेशा निभा पाया है।
बस यही जिंदगी की खूबसूरत कहानी है,
कुछ पल की खुशियाँ, कुछ पल आँखों में पानी है।
आखिर जिंदगी एक रंगमंच ही तो है,
जहाँ हर शख्स मुसाफिर भी है और किरदार भी।
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