ग्रीष्म ऋतु का भीषण आतप,
पशु-पक्षी सब व्याकुल हैं।
कैसे प्यास बुझे नर का,
सब ठंडे जल को आतुर हैं।
ये मिट्टी के बने सुराही,
रखते जल को ठंडा
हम भी लाएं एक सुराही,
पायें नित जल ठंडा।।
. ––संजय कुमार गुप्त ‘अबोध'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X