फूलों को महकाया किसने,
चिड़ियों को चहकाया किसने,
बादल को वर्षाया किसने,
कलियों को हर्षाया किसने ?
सूरज को दहकाया किसने,
चंदा को चमकाया किसने,
सागर को लहराया किसने,
हिमगिरि को उठाया किसने ?
मलय समीर बहाया किसने,
चराचर जगत बनाया किसने,
विविध जीव बनाए इतने
ये करामात दिखाया किसने ?
वह पुरुषोत्तम जगत पिता है,
यह सब जाल बिछाया जिसने,
उस जगदीश्वर के गुण गायें,
उसे प्रेम से शीश झुकायें ।
हाथ जोड़ हम विनती करते,
हम अबोध ध्यान हैं धरते,
रखे सलामत हम बच्चों को,
जगती का संताप जो हरते ।
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