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मूंछें होतीं शान पुरुष की

                
                                                         
                            मूंछें होतीं शान पुरुष की,
                                                                 
                            
मूंछें ही स्वाभिमान
मूंछों की रक्षा की खातिर,
हुए वीर बलिदान ।
नर नारी में भेद बताती,
मर्दों की पहचान
रक्षा करना उनकी तुम,
देकर अपनी जान ।।

अब तो मुश्किल से दिखते हैं,
मूंछों वाले लोग
मूंछ मुंडाने का युवकों में,
बढ़ रहा क्यों रोग ।
भारतीय संस्कृति की वाहक ये,
होने लगी विनष्ट
मूंछ मुंडाना, बाल बढ़ाना,
हुई सभ्यता नष्ट।।
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एक घंटा पहले

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