बहुत हो गया अत्याचार,
जुल्म शरारत और व्यभिचार,
दया नहीं, केवल फांसी ही,
रेप के बदले दे सरकार ।
सहन किया चुप रहकर सब कुछ,
चाहिए हमको अपना अधिकार
स्वतंत्रता हो जीने की हमको,
घृणित सोच वालों! तुमको धिक्कार।।
––संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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