आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ऐसा कहां नसीबाँ अपना

                
                                                         
                            ऐसा कहाँ नसीबाँ अपना,
                                                                 
                            
पढ़ा सकें जो तुमको हम।
दिखा सके जो सुंदर सपना,
बढ़ा सकें जो तुमको हम।

यह अपना पुस्तैनी धंधा,
सीखो इसको देगा काम।
भुखमरी बेबसी और लाचारी,
निर्धनता का दूसरा नाम।।

––संजय कुमार गुप्त 'अबोध’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर