आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चांद धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा है

                
                                                         
                            देख रास्ता चंद धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा है।
                                                                 
                            
रात घनेरी जाग रहे हैं
धीरे-धीरे चोरी चोरी चुपके चुपके
कोई प्रेम कहानी जाग रही है ।।

किसी की यादों में खोया हुआ दिल
आज फिर कुछ कह रहा है
थम सा गया ये सारा जमाना
समा सुहाना जादू कर रहा है।।

उत्तर रहे हैं कलियां फूलों की बहार में
खुशबू बिखर रही है हवाओं में
रात जवानी जाग रही है धीरे-धीरे
कोई गीत बज रहा फिजाओं में

चांद मुस्कुरा कर यूं कर रहा इशारे
जैसे जानता हो दिल के राज सारे
इंतजार में नैना अब थकते नहीं
नींद आती है मगर सोते नही ।।

कोई प्रेम दीवाना नींद चुरा के ले गया
यादों का दीपक दिल में जल गया
दहलीज पर हमारी रात ठहर सी गई
और नींदे जाने कहां चली गयी ।।

इस जहां की चांदनी रातों से पूछौं
आ गए हम कहां अब किससे पूछो
किस मोड़ पर छूट गयी दुनिया सारी
कहां ख्यालो में रात हमारी
देख रास्ता चंद धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा है।
रात घनेरी जाग रहे हैं
किसी की यादों में कोई प्रेम कहानी जाग रही है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
42 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर