समझ में नहीं आता था
मुझे कभी भी ये तराना
कैसे संभव है सीखे हुए
ज्ञान को भुला पाना
जब शुरू करे परिस्थिति
कुछ आपको सिखाना
सीख जाएंगे सरलता से
सीखा ज्ञान भुलाना
लगता था ईमानदारी को
सही का साथ रहता है
पर अब मानते हैं वही
जो उनके हित में जाता है
हित नहीं उनका अगर
ईमान भी है बेकार
छोड़कर ईमान का ज्ञान
इसी धरा पर चलो यार
-संदीप सिंह ‘कुँवर’
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