अभाव है मेरे भीतर
समन्वय और अंतरवैयक्तिक
संबंधों की क्षमता का क्योंकि मैं
गलत को गलत बोल देता हूँ।
अब बदल रहा हूँ अपनी आदत
सीखे हुए ज्ञान को भुलाकर
अवलोकन से नजरें बचाकर।
-कुँवर
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