आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मैं सबमें रहता हूँ।

                
                                                         
                            जब कभी भी मैं
                                                                 
                            
आपके पास नहीं रहता,
तो भी मैं
आपके पास रहता हूँ।

आपके कदमों की आहट में,
रुनझुन करती
पायल की छम-छम में,
और माथे पर इठलाती
आपकी नन्ही-सी बिंदी में,
मैं सबमें रहता हूँ।

घर के हर कोने में,
रिमझिम करती
बारिश की हल्की फुहार में,
और सुबह की पहली चाय
और उसकी चुस्की में,
मैं सबमें रहता हूँ।

शाम की ढलती धूप में,
खिड़की से आती
ठंडी-सी हवा में,
और बालों को सहलाती
उस हवा की छुअन में,
मैं सबमें रहता हूँ।

रात की खामोशी में,
दिल में बहती हुई
आपकी मेरी यादों में,
आपकी आँखों में उतरती
उस हल्की-सी मुस्कान में,
मैं सबमें रहता हूँ।

और जब कभी
आप अकेली होती हैं,
बिना मुझसे कुछ कहे
मुझे बहुत याद करती हैं,
तो आप यकीन मानिए…
उस पल में भी
मैं आपके पास रहता हूँ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर